Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 46

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

भूयश्च शतवार्षिक्यामनावृष्ट्यामनम्भसि । मुनिभिः संस्तुता भूमौ सम्भविष्याम्ययोनिजा ॥ ४६ ॥

bhūyaśhcha śhatavārṣhikyāmanāvṛiṣhṭyāmanambhasi munibhiḥ saṁstutā bhūmau sambhaviṣhyāmyayonijā

हिंदी अर्थ

फिर जब पृथ्वी पर सौ वर्षों तक वर्षा नहीं होगी और पानी का अभाव हो जाएगा, तब मुनियों के स्तवन करने पर मैं पृथ्वी पर अयोनिजा रूप में प्रकट होऊँगी।

भावार्थ

तीसरा अवतार, सूखे के समय।