देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीते र्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः । पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान् ॥ ३४ ॥
devi prasīda paripālaya no’ribhīte rnityaṁ yathāsuravadhādadhunaiva sadyaḥ pāpāni sarvajagatāṁ praśhamaṁ nayāśhu utpātapākajanitāṁśhcha mahopasargān
हिंदी अर्थ
देवि! प्रसन्न होओ। जैसे इस समय असुरों का वध करके तुमने शीघ्र हमारी रक्षा की है, वैसे ही सदा हमें शत्रुओं के भय से बचाओ। सम्पूर्ण जगत के पाप नष्ट कर दो, और उत्पात तथा पापों के फल से आने वाले महामारी जैसे बड़े उपद्रवों को शीघ्र दूर करो।
भावार्थ
पूरे जगत के लिए प्रार्थना, जिसमें महामारी जैसे उपद्रवों ("महोपसर्ग") से मुक्ति भी शामिल है। गीता प्रेस यहाँ "च शमं" पाठान्तर बताता है।
