प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि । त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव ॥ ३५ ॥
praṇatānāṁ prasīda tvaṁ devi viśhvārtihāriṇi trailokyavāsināmīḍye lokānāṁ varadā bhava
हिंदी अर्थ
विश्व की पीड़ा दूर करने वाली देवि! हम तुम्हारे चरणों में पड़े हैं, हम पर प्रसन्न होओ। त्रिलोकवासियों की पूजनीया! सब लोगों को वरदान दो।"
भावार्थ
स्तुति केवल देवताओं के लिए नहीं, सब लोकों के लिए वरदान माँगकर समाप्त होती है।
