रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र । दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम् ॥ ३२ ॥
rakṣhāṁsi yatrograviṣhāśhcha nāgā yatrārayo dasyubalāni yatra dāvānalo yatra tathābdhimadhye tatra sthitā tvaṁ paripāsi viśhvam
हिंदी अर्थ
जहाँ राक्षस हों, जहाँ भयंकर विष वाले सर्प हों, जहाँ शत्रु और लुटेरों की सेना हो, जहाँ दावानल हो, वहाँ और समुद्र के बीच भी तुम साथ रहकर विश्व की रक्षा करती हो।
भावार्थ
वास्तविक संकटों की सूची, हर एक में उनकी उपस्थिति।
