Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 25

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

एतत्ते वदनं सौम्यं लोचनत्रयभूषितम् । पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायनि नमोऽस्तु ते ॥ २५ ॥

etatte vadanaṁ saumyaṁ lochanatrayabhūṣhitam pātu naḥ sarvabhītibhyaḥ kātyāyani namo’stu te

हिंदी अर्थ

कात्यायनि! तीन नेत्रों से विभूषित तुम्हारा यह सौम्य मुख सब भयों से हमारी रक्षा करे; तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

पहले उनका सौम्य मुख, फिर उनके आयुध।