Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 24

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥ २४ ॥

sarvasvarūpe sarveśhe sarvaśhaktisamanvite bhayebhyastrāhi no devi durge devi namo’stu te

हिंदी अर्थ

सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी और सब शक्तियों से सम्पन्न दुर्गा देवि! सब भयों से हमारी रक्षा करो; देवि, तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

"सर्वस्वरूपे सर्वेशे": एक और श्लोक जो भय से रक्षा के लिए व्यापक रूप से अलग से पढ़ा जाता है। अब टेक बदलती है: श्लोक 24 से 28 उनके हर अंग और आयुध से रक्षा माँगते हैं।