Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 26

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम् । त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते ॥ २६ ॥

jvālākarālamatyugramaśheṣhāsurasūdanam triśhūlaṁ pātu no bhīterbhadrakāli namo’stu te

हिंदी अर्थ

भद्रकाली! ज्वालाओं से विकराल, अत्यंत भयंकर और समस्त असुरों का संहार करने वाला तुम्हारा त्रिशूल भय से हमें बचाए; तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

जिस त्रिशूल ने शुम्भ को मारा, वही अब भक्त की रक्षा करता है।