Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 13

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

हंसयुक्तविमानस्थे ब्रह्माणीरूपधारिणि । कौशाम्भःक्षरिके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १३ ॥

haṁsayuktavimānasthe brahmāṇīrūpadhāriṇi kauśhāmbhaḥkṣharike devi nārāyaṇi namo’stu te

हिंदी अर्थ

हंसों से जुते विमान पर बैठने वाली, ब्रह्माणी का रूप धारण करने वाली और कुश-मिश्रित जल छिड़कने वाली नारायणी देवि! तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

श्लोक 13 से 21 अध्याय 8 की प्रत्येक मातृका के रूप में देवी को नमस्कार करते हैं, ब्रह्माणी और उनके जल (8.15, 9.38) से आरम्भ करके।