Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 12

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १२ ॥

śharaṇāgatadīnārtaparitrāṇaparāyaṇe sarvasyārtihare devi nārāyaṇi namo’stu te

हिंदी अर्थ

शरण में आए दीनों और पीड़ितों की रक्षा में तत्पर, सबकी पीड़ा हरने वाली नारायणी देवि! तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

"शरणागतदीनार्त": एक और श्लोक जो प्रायः अलग से पढ़ा जाता है, असहायों की रक्षा की प्रार्थना।