शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १२ ॥
śharaṇāgatadīnārtaparitrāṇaparāyaṇe sarvasyārtihare devi nārāyaṇi namo’stu te
हिंदी अर्थ
शरण में आए दीनों और पीड़ितों की रक्षा में तत्पर, सबकी पीड़ा हरने वाली नारायणी देवि! तुम्हें नमस्कार है।
भावार्थ
"शरणागतदीनार्त": एक और श्लोक जो प्रायः अलग से पढ़ा जाता है, असहायों की रक्षा की प्रार्थना।
