Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 10, श्लोक 29

शुम्भवध

उत्पातमेघाः सोल्का ये प्रागासंस्ते शमं ययुः । सरितो मार्गवाहिन्यस्तथासंस्तत्र पातिते ॥ २९ ॥

utpātameghāḥ solkā ye prāgāsaṁste śhamaṁ yayuḥ sarito mārgavāhinyastathāsaṁstatra pātite

हिंदी अर्थ

पहले जो उत्पात-सूचक मेघ और उल्काएँ थीं, वे शांत हो गईं, और उसके गिरने पर नदियाँ ठीक मार्ग से बहने लगीं।

भावार्थ

प्रकृति अपनी उचित व्यवस्था में लौटती है: नदियाँ फिर ठीक मार्ग से बहती हैं।