Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 10, श्लोक 27

शुम्भवध

स गतासुः पपातोर्व्यां देवीशूलाग्रविक्षतः । चालयन् सकलां पृथ्वीं साब्धिद्वीपां सपर्वताम् ॥ २७ ॥

sa gatāsuḥ papātorvyāṁ devīśhūlāgravikṣhataḥ chālayan sakalāṁ pṛithvīṁ sābdhidvīpāṁ saparvatām

हिंदी अर्थ

देवी के शूल की नोक से घायल होकर वह प्राणहीन होकर पृथ्वी पर गिरा, समुद्रों, द्वीपों और पर्वतों सहित समूची पृथ्वी को कँपाता हुआ।

भावार्थ

शुम्भ मारा गया, और उसका गिरना पूरी पृथ्वी को हिला देता है।