Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 10, श्लोक 19

शुम्भवध

चिच्छेदापततस्तस्य मुद्गरं निशितैः शरैः । तथापि सोऽभ्यधावत्तां मुष्टिमुद्यम्य वेगवान् ॥ १९ ॥

chichchhedāpatatastasya mudgaraṁ niśhitaiḥ śharaiḥ tathāpi so’bhyadhāvattāṁ muṣhṭimudyamya vegavān

हिंदी अर्थ

उसके आते ही देवी ने तीखे बाणों से उसका मुद्गर भी काट डाला; फिर भी वह मुक्का तानकर बड़े वेग से उनकी ओर झपटा।

भावार्थ

अब केवल उसकी खाली मुट्ठी बची है।