Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 80

मधुकैटभवध

लज्जा पुष्टिस्तथा तुष्टिस्त्वं शान्तिः क्षान्तिरेव च । खड्गिनी शूलिनी घोरा गदिनी चक्रिणी तथा ॥ ८० ॥

lajjā puṣhṭistathā tuṣhṭistvaṁ śhāntiḥ kṣhāntireva cha khaḍginī śhūlinī ghorā gadinī chakriṇī tathā

हिंदी अर्थ

तुम्हीं लज्जा, पुष्टि और तुष्टि हो, तुम्हीं शांति और क्षमा हो। तुम भयंकर हो और खड्ग, शूल, गदा तथा चक्र धारण करती हो,

भावार्थ

स्तुति आंतरिक गुणों (शांति, क्षमा) से सीधे शस्त्रों पर आ जाती है। जो माता भीतर से कोमल हैं, वही अपनी संतानों के लिए भयंकर युद्ध भी करती हैं।