Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 79

मधुकैटभवध

कालरात्रिर्महारात्रिर्मोहरात्रिश्च दारुणा । त्वं श्रीस्त्वमीश्वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा ॥ ७९ ॥

kālarātrirmahārātrirmoharātriśhcha dāruṇā tvaṁ śhrīstvamīśhvarī tvaṁ hrīstvaṁ buddhirbodhalakṣhaṇā

हिंदी अर्थ

तुम्हीं कालरात्रि, महारात्रि और भयंकर मोहरात्रि हो। तुम्हीं श्री, तुम्हीं ईश्वरी, तुम्हीं ह्री और तुम्हीं बोधस्वरूपा बुद्धि हो,

भावार्थ

तीन "रात्रियों" की एक पारंपरिक व्याख्या है: प्रलय की रात्रि ("कालरात्रि"), शिव की महान रात्रि ("महारात्रि", महाशिवरात्रि से जुड़ी) और मोह की रात्रि ("मोहरात्रि", जन्माष्टमी से जुड़ी)। वे एक साथ अंधेरी रात भी हैं और उज्ज्वल सौभाग्य ("श्री") भी।