Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 81

मधुकैटभवध

शङ्खिनी चापिनी बाणभुशुण्डीपरिघायुधा । सौम्या सौम्यतराशेषसौम्येभ्यस्त्वतिसुन्दरी ॥ ८१ ॥

śhaṅkhinī chāpinī bāṇabhuśhuṇḍīparighāyudhā saumyā saumyatarāśheṣhasaumyebhyastvatisundarī

हिंदी अर्थ

शंख, धनुष, बाण, भुशुण्डी और परिघ भी। तुम सौम्य हो, सौम्य से भी अधिक सौम्य, सब सौम्य वस्तुओं से भी अत्यंत सुंदर,

भावार्थ

शस्त्रों के ठीक बाद स्तुति उन्हें "सौम्यतरा" (सौम्य से भी सौम्य) कहती है। भयंकर और सौम्य एक ही सत्य के दो रूप हैं, यह विषय सप्तशती में बार-बार लौटता है।