स्वारोचिषेऽन्तरे पूर्वं चैत्रवंशसमुद्भवः । सुरथो नाम राजाभूत्समस्ते क्षितिमण्डले ॥ ४ ॥
svārochiṣhe’ntare pūrvaṁ chaitravaṁśhasamudbhavaḥ suratho nāma rājābhūtsamaste kṣhitimaṇḍale
हिंदी अर्थ
पूर्वकाल में स्वारोचिष मन्वन्तर में चैत्रवंश में उत्पन्न सुरथ नाम के एक राजा थे, जिनका सम्पूर्ण भूमण्डल पर राज्य था।
भावार्थ
राजा सुरथ (जिनके नाम का अर्थ है "उत्तम रथ वाला") वह श्रोता हैं जिनका जीवन पूरी सप्तशती का ढाँचा है। आगे के मन्वन्तर में वे सावर्णि, आठवें मनु, के रूप में जन्म लेंगे (13.22–23, 13.28–29)।
