Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 3

मधुकैटभवध

महामायानुभावेन यथा मन्वन्तराधिपः । स बभूव महाभागः सावर्णिस्तनयो रवेः ॥ ३ ॥

mahāmāyānubhāvena yathā manvantarādhipaḥ sa babhūva mahābhāgaḥ sāvarṇistanayo raveḥ

हिंदी अर्थ

सूर्यपुत्र महाभाग सावर्णि महामाया के प्रभाव से जिस प्रकार मन्वन्तर के स्वामी बने, वह सुनो।

भावार्थ

"महामाया" (माया की महान शक्ति) का नाम तीसरे ही श्लोक में आता है और पूरे ग्रंथ में चलता है। जो शक्ति जीवों को ममता में बाँधती है, वही सुरथ को सर्वोच्च पद तक उठाती है। कथा उन्हें इन दोनों रूपों में दिखाएगी।