सावर्णिः सूर्यतनयो यो मनुः कथ्यतेऽष्टमः । निशामय तदुत्पत्तिं विस्तराद् गदतो मम ॥ २ ॥
sāvarṇiḥ sūryatanayo yo manuḥ kathyate’ṣhṭamaḥ niśhāmaya tadutpattiṁ vistarād gadato mama
हिंदी अर्थ
सूर्य के पुत्र सावर्णि, जो आठवें मनु कहे जाते हैं, उनकी उत्पत्ति की कथा मैं विस्तार से कहता हूँ, सुनो।
भावार्थ
दुर्गा सप्तशती (जिसे देवी माहात्म्य या चण्डी पाठ भी कहते हैं) सामान्यतः छपे संस्करणों में मार्कण्डेय पुराण के अध्याय 81–93 हैं, जिन्हें मार्कण्डेय ऋषि अपने शिष्य को सुनाते हैं। यह एक ब्रह्मांडीय इतिहास के प्रश्न से आरंभ होती है: सावर्णि पूरे मन्वन्तर के अधिपति मनु कैसे बने? तेरह अध्यायों में दिया गया उत्तर है, देवी की कृपा।
