भिन्नस्य तस्य शूलेन हृदयान्निःसृतोऽपरः । महाबलो महावीर्यस्तिष्ठेति पुरुषो वदन् ॥ ३५ ॥
bhinnasya tasya śhūlena hṛidayānniḥsṛito’paraḥ mahābalo mahāvīryastiṣhṭheti puruṣho vadan
हिंदी अर्थ
शूल से विदीर्ण हुई उसकी छाती से एक दूसरा महाबली, महापराक्रमी पुरुष "खड़ी रह!" कहता हुआ निकला।
भावार्थ
महिष (3.41) की तरह, मरते असुर से एक दूसरा रूप निकलता है।
