Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 9, श्लोक 34

निशुम्भवध

शूलहस्तं समायान्तं निशुम्भममरार्दनम् । हृदि विव्याध शूलेन वेगाविद्धेन चण्डिका ॥ ३४ ॥

śhūlahastaṁ samāyāntaṁ niśhumbhamamarārdanam hṛidi vivyādha śhūlena vegāviddhena chaṇḍikā

हिंदी अर्थ

देवताओं को पीड़ा देने वाले निशुम्भ को शूल लिए आते देख चण्डिका ने वेग से चलाए अपने शूल से उसकी छाती छेद डाली।

भावार्थ

हृदय पर सीधा प्रहार।