Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 9, श्लोक 27

निशुम्भवध

शुम्भमुक्ताञ्छरान्देवी शुम्भस्तत्प्रहिताञ्छरान् । चिच्छेद स्वशरैरुग्रैः शतशोऽथ सहस्रशः ॥ २७ ॥

śhumbhamuktāñchharāndevī śhumbhastatprahitāñchharān chichchheda svaśharairugraiḥ śhataśho’tha sahasraśhaḥ

हिंदी अर्थ

शुम्भ के चलाए बाणों को देवी ने, और देवी के चलाए बाणों को शुम्भ ने, अपने भयंकर बाणों से सैकड़ों-हज़ारों टुकड़ों में काट दिया।

भावार्थ

क्षण भर के लिए बाणों का बराबर का आदान-प्रदान।