सिंहनादेन शुम्भस्य व्याप्तं लोकत्रयान्तरम् । निर्घातनिःस्वनो घोरो जितवानवनीपते ॥ २६ ॥
siṁhanādena śhumbhasya vyāptaṁ lokatrayāntaram nirghātaniḥsvano ghoro jitavānavanīpate
हिंदी अर्थ
हे राजन्! शुम्भ के सिंहनाद से तीनों लोक गूँज उठे, और वज्रपात के समान भयानक ध्वनि ने अन्य सब शब्दों को जीत लिया।
भावार्थ
शुम्भ देवी की ध्वनियों का उत्तर अपनी गर्जना से देता है।
