Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 9, श्लोक 20

निशुम्भवध

पूरयामास ककुभो निजघण्टास्वनेन च । समस्तदैत्यसैन्यानां तेजोवधविधायिना ॥ २० ॥

pūrayāmāsa kakubho nijaghaṇṭāsvanena cha samastadaityasainyānāṁ tejovadhavidhāyinā

हिंदी अर्थ

और अपने घंटे की ध्वनि से, जो सब दैत्य सेनाओं के तेज को नष्ट करती है, दिशाओं को भर दिया।

भावार्थ

घंटा असुरों का बल खींच लेता है।