Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 59

रक्तबीजवध

यतस्ततस्तद्वक्त्रेण चामुण्डा सम्प्रतीच्छति । मुखे समुद्गता येऽस्या रक्तपातान्महासुराः ॥ ५९ ॥

yatastatastadvaktreṇa chāmuṇḍā sampratīchchhati mukhe samudgatā ye’syā raktapātānmahāsurāḥ

हिंदी अर्थ

और जहाँ-जहाँ वह गिरा, चामुण्डा ने उसे अपने मुख में ले लिया। रक्त गिरने से उनके मुख में जो महादैत्य उत्पन्न हुए,

भावार्थ

उनके मुख में उत्पन्न असुर भी वहीं समाप्त हो जाते हैं।