Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 55

रक्तबीजवध

भक्षयन्ती चर रणे तदुत्पन्नान्महासुरान् । एवमेष क्षयं दैत्यः क्षीणरक्तो गमिष्यति ॥ ५५ ॥

bhakṣhayantī chara raṇe tadutpannānmahāsurān evameṣha kṣhayaṁ daityaḥ kṣhīṇarakto gamiṣhyati

हिंदी अर्थ

उनसे उत्पन्न महादैत्यों को खाती हुई रणभूमि में विचरो; इस प्रकार रक्त क्षीण हो जाने पर वह दैत्य नष्ट हो जाएगा।

भावार्थ

"क्षीणरक्तो गमिष्यति" (रक्त क्षीण होने पर नष्ट होगा): असुर अधिक बल से नहीं, बल्कि उसके स्रोत को काटने से पराजित होता है।