तेऽपि श्रुत्वा वचो देव्याः शर्वाख्यातं महासुराः । अमर्षापूरिता जग्मुर्यत्र कात्यायनी स्थिता ॥ २९ ॥
te’pi śhrutvā vacho devyāḥ śharvākhyātaṁ mahāsurāḥ amarṣhāpūritā jagmuryatra kātyāyanī sthitā
हिंदी अर्थ
वे महादैत्य भी शिव के मुख से देवी के वचन सुनकर अमर्ष से भर गए और जहाँ कात्यायनी विराजमान थीं, वहाँ गए।
भावार्थ
"कात्यायनी" देवी का एक और नाम है, जिनकी आज नवरात्रि के छठे दिन उपासना होती है। गीता प्रेस यहाँ "जग्मुर्यतः" पाठान्तर बताता है।
