Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 7, श्लोक 27

चण्डमुण्डवध

यस्माच्चण्डं च मुण्डं च गृहीत्वा त्वमुपागता । चामुण्डेति ततो लोके ख्याता देवि भविष्यसि ॥ २७ ॥

yasmāchchaṇḍaṁ cha muṇḍaṁ cha gṛihītvā tvamupāgatā chāmuṇḍeti tato loke khyātā devi bhaviṣhyasi

हिंदी अर्थ

"क्योंकि तुम चण्ड और मुण्ड को लेकर मेरे पास आई हो, इसलिए हे देवि! संसार में तुम "चामुण्डा" नाम से विख्यात होगी।"

भावार्थ

"चामुण्डा" नाम का उद्भव, चण्ड + मुण्ड से। चामुण्डा की व्यापक उपासना होती है, विशेषकर उग्र रूपों में, और यह नाम सप्तशती के साथ जपे जाने वाले नवार्ण मंत्र ("ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे") में आता है।