Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 7, श्लोक 24

चण्डमुण्डवध

मया तवात्रोपहृतौ चण्डमुण्डौ महापशू । युद्धयज्ञे स्वयं शुम्भं निशुम्भं च हनिष्यसि ॥ २४ ॥

mayā tavātropahṛitau chaṇḍamuṇḍau mahāpaśhū yuddhayajñe svayaṁ śhumbhaṁ niśhumbhaṁ cha haniṣhyasi

हिंदी अर्थ

"मैंने चण्ड और मुण्ड, इन दो महापशुओं को यहाँ तुम्हें भेंट किया है। युद्धयज्ञ में शुम्भ और निशुम्भ का वध तुम स्वयं करोगी।"

भावार्थ

"युद्धयज्ञ": युद्ध को एक यज्ञीय आहुति के रूप में, और असुरों को बलि-पशु के रूप में प्रस्तुत किया गया है।