शिरश्चण्डस्य काली च गृहीत्वा मुण्डमेव च । प्राह प्रचण्डाट्टहासमिश्रमभ्येत्य चण्डिकाम् ॥ २३ ॥
śhiraśhchaṇḍasya kālī cha gṛihītvā muṇḍameva cha prāha prachaṇḍāṭṭahāsamiśhramabhyetya chaṇḍikām
हिंदी अर्थ
चण्ड और मुण्ड के सिर लेकर काली चण्डिका के पास आईं और प्रचण्ड अट्टहास के साथ बोलीं:
भावार्थ
काली सिरों को भेंट के रूप में देवी के पास लाती हैं।
