उत्थाय च महासिं हं देवी चण्डमधावत । गृहीत्वा चास्य केशेषु शिरस्तेनासिनाच्छिनत् ॥ २० ॥
utthāya cha mahāsiṁ haṁ devī chaṇḍamadhāvata gṛihītvā chāsya keśheṣhu śhirastenāsināchchhinat
हिंदी अर्थ
उठकर, बड़ी तलवार लेकर "हं" का उच्चारण करती हुई देवी चण्ड पर झपटीं, और उसके बाल पकड़कर उसी तलवार से उसका सिर काट डाला।
भावार्थ
गीता प्रेस के पाठ में "महासिं हं" है, जिसमें "हं" अलग बीज-अक्षर है जिसका उच्चारण वे आक्रमण करते हुए करती हैं। गीता प्रेस बताता है कि शान्तनवी टीकाकार यहाँ एक श्लोक और मानते हैं, जो चण्ड की मरणासन्न गर्जना का वर्णन करता है।
