तानि चक्राण्यनेकानि विशमानानि तन्मुखम् । बभुर्यथार्कबिम्बानि सुबहूनि घनोदरम् ॥ १८ ॥
tāni chakrāṇyanekāni viśhamānāni tanmukham babhuryathārkabimbāni subahūni ghanodaram
हिंदी अर्थ
उनके मुख में समाते हुए वे अनेक चक्र ऐसे लगे, मानो सूर्य के बहुत से मंडल बादल के उदर में प्रवेश कर रहे हों।
भावार्थ
एक सुंदर उपमा: चमकते चक्र उनके श्याम मुख में ऐसे समा जाते हैं, जैसे सूर्य बादल में।
