Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 7, श्लोक 17

चण्डमुण्डवध

शरवर्षैर्महाभीमैर्भीमाक्षीं तां महासुरः । छादयामास चक्रैश्च मुण्डः क्षिप्तैः सहस्रशः ॥ १७ ॥

śharavarṣhairmahābhīmairbhīmākṣhīṁ tāṁ mahāsuraḥ chhādayāmāsa chakraiśhcha muṇḍaḥ kṣhiptaiḥ sahasraśhaḥ

हिंदी अर्थ

उस महादैत्य ने भयानक बाणों की वर्षा से, और मुण्ड ने हज़ारों बार चलाए गए चक्रों से, उन भयानक नेत्रों वाली देवी को ढक दिया।

भावार्थ

चण्ड और मुण्ड साथ मिलकर आक्रमण करते हैं।