केषाञ्चित्पाटयामास नखैः कोष्ठानि केसरी । तथा तलप्रहारेण शिरांसि कृतवान् पृथक् ॥ १७ ॥
keṣhāñchitpāṭayāmāsa nakhaiḥ koṣhṭhāni kesarī tathā talaprahāreṇa śhirāṁsi kṛitavān pṛithak
हिंदी अर्थ
उस सिंह ने नखों से कुछ के पेट फाड़ डाले, और पंजे के प्रहार से कुछ के सिर धड़ से अलग कर दिए।
भावार्थ
गीता प्रेस बताता है कि बंगला प्रति में सब जगह "केशरी" तालव्य "श" से लिखा है।
