Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 88

देव्या दूतसंवाद

तस्यां विनिर्गतायां तु कृष्णाभूत्सापि पार्वती । कालिकेति समाख्याता हिमाचलकृताश्रया ॥ ८८ ॥

tasyāṁ vinirgatāyāṁ tu kṛiṣhṇābhūtsāpi pārvatī kāliketi samākhyātā himāchalakṛitāśhrayā

हिंदी अर्थ

कौशिकी के निकल जाने पर पार्वती स्वयं काली हो गईं, और हिमालय पर रहने वाली कालिका नाम से विख्यात हुईं।

भावार्थ

एक देवी दो हो जाती हैं: गौर वर्ण कौशिकी जो युद्ध करेंगी, और श्याम वर्ण कालिका। यह एक व्याख्या है कि पार्वती गौरी (गौर) भी हैं और काली (श्याम) भी।