Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 68–70

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ६८-७० ॥

yā devī sarvabhūteṣhu tuṣhṭirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में तुष्टि रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"तुष्टि", संतोष: जो है उसमें संतुष्ट रहना।