Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 71–73

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ७१-७३ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu mātṛirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में माता रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"माता": हर माँ का प्रेम स्वयं देवी का है। यह पद विशेष रूप से प्रिय है।