Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 65–67

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ६५-६७ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu dayārūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में दया रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"दया", जिसकी प्रशंसा देवताओं ने 4.21 में की थी, शत्रुओं के प्रति भी।