Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 62–64

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ६२-६४ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu smṛitirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में स्मृति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"स्मृति" गीता 15.15 की प्रतिध्वनि है, जहाँ स्मृति और विस्मृति हृदय में स्थित ईश्वर से आती हैं।