या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ६२-६४ ॥
yā devī sarvabhūteṣhu smṛitirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ
हिंदी अर्थ
जो देवी सब प्राणियों में स्मृति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
भावार्थ
"स्मृति" गीता 15.15 की प्रतिध्वनि है, जहाँ स्मृति और विस्मृति हृदय में स्थित ईश्वर से आती हैं।
