Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 59–61

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५९-६१ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu vṛittirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में वृत्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"वृत्ति" का अर्थ जीविका भी हो सकता है और मन की गतिविधि भी। दोनों ही तरह, जीवन का कर्म और गति उन्हीं की है।