Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 56–58

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५६-५८ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu lakṣhmīrūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में लक्ष्मी रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"लक्ष्मी", हर रूप में समृद्धि और सौभाग्य।