Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 32–34

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ३२-३४ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu śhaktirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"शक्ति", बल या ऊर्जा: शाक्त परंपरा में स्वयं देवी का नाम। किसी भी प्राणी का हर बल उन्हीं का है।