Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 29–31

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषुच्छायारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ २९-३१ ॥

yā devī sarvabhūteṣhuchchhāyārūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में छाया रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"छाया" को कभी प्राणियों में दिव्यता का प्रतिबिंब, और कभी उनके द्वारा दी गई शरण के रूप में पढ़ा जाता है।