या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ २३-२५ ॥
yā devī sarvabhūteṣhu nidrārūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ
हिंदी अर्थ
जो देवी सब प्राणियों में निद्रा रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
भावार्थ
निद्रा भी उनका रूप है, जैसे योगनिद्रा के रूप में उन्होंने अध्याय 1 में विष्णु को धारण किया। विश्राम स्वयं पवित्र है।
