Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 23–25

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ २३-२५ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu nidrārūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में निद्रा रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

निद्रा भी उनका रूप है, जैसे योगनिद्रा के रूप में उन्होंने अध्याय 1 में विष्णु को धारण किया। विश्राम स्वयं पवित्र है।