Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 20–22

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ २०-२२ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu buddhirūpeṇa saṁsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में बुद्धि रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"बुद्धि", समझने और निर्णय करने की शक्ति। यहाँ से हर पद "...रूपेण संस्थिता" (...के रूप में स्थित) के ढर्रे पर है।