Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 17–19

देव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ १७-१९ ॥

yā devī sarvabhūteṣhu chetanetyabhidhīyate namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

जो देवी सब प्राणियों में चेतना कहलाती हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"चेतना", स्वयं चैतन्य। हर जीव में जो जागरूकता है, वह देवी हैं।