कल्याण्यै प्रणतां वृद्ध्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नमः । नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः ॥ ११ ॥
kalyāṇyai praṇatāṁ vṛiddhyai siddhyai kurmo namo namaḥ nairṛityai bhūbhṛitāṁ lakṣhmyai śharvāṇyai te namo namaḥ
हिंदी अर्थ
शरणागतों के लिए कल्याण, वृद्धि और सिद्धि रूप देवी को हम बार-बार नमस्कार करते हैं। नैर्ऋती, राजाओं की लक्ष्मी और शर्वाणी रूपा आपको बार-बार नमस्कार।
भावार्थ
"शर्वाणी" शिव की पत्नी हैं; "नैर्ऋती" दक्षिण-पश्चिम की देवी, जो राक्षसों के सौभाग्य से जुड़ी हैं। गीता प्रेस यहाँ "प्रणतां" के अन्वय पर शान्तनवी टीका की टिप्पणी देता है, साथ में "प्रणताः" पाठान्तर भी।
