Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4, श्लोक 6

शक्रादिस्तुति

किं वर्णयाम तव रूपमचिन्त्यमेतत् किं चातिवीर्यमसुरक्षयकारि भूरि । किं चाहवेषु चरितानि तवाद्भुतानि सर्वेषु देव्यसुरदेवगणादिकेषु ॥ ६ ॥

kiṁ varṇayāma tava rūpamachintyametat kiṁ chātivīryamasurakṣhayakāri bhūri kiṁ chāhaveṣhu charitāni tavādbhutāni sarveṣhu devyasuradevagaṇādikeṣhu

हिंदी अर्थ

हम आपके इस अचिंत्य रूप का क्या वर्णन करें? असुरों का नाश करने वाले आपके अपार पराक्रम का, और देवताओं, असुरों आदि सबके बीच युद्धों में आपके अद्भुत चरित्रों का क्या वर्णन करें?

भावार्थ

विस्मय के तीन प्रश्न: उनका रूप, उनका बल, उनके कर्म। देवता हर एक को शब्दों से परे पाते हैं।