Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4, श्लोक 40

शक्रादिस्तुति

इत्येतत्कथितं भूप सम्भूता सा यथा पुरा । देवी देवशरीरेभ्यो जगत्त्रयहितैषिणी ॥ ४० ॥

ityetatkathitaṁ bhūpa sambhūtā sā yathā purā devī devaśharīrebhyo jagattrayahitaiṣhiṇī

हिंदी अर्थ

हे भूप! इस प्रकार मैंने तुम्हें बताया कि पूर्वकाल में तीनों लोकों का हित चाहने वाली देवी देवताओं के शरीरों से कैसे प्रकट हुईं।

भावार्थ

मध्यम चरित्र समाप्त होता है। आगे बढ़ने से पहले मेधा सार कहते हैं।