इति प्रसादिता देवैर्जगतोऽर्थे तथाऽऽत्मनः । तथेत्युक्त्वा भद्रकाली बभूवान्तर्हिता नृप ॥ ३९ ॥
iti prasāditā devairjagato’rthe tathā’’tmanaḥ tathetyuktvā bhadrakālī babhūvāntarhitā nṛipa
हिंदी अर्थ
"हे राजन्! देवताओं द्वारा जगत के और अपने कल्याण के लिए इस प्रकार प्रसन्न किए जाने पर भद्रकाली 'तथास्तु' कहकर अंतर्धान हो गईं।
भावार्थ
वर देकर देवी अंतर्धान हो जाती हैं। वे आवश्यकता होने पर आती हैं और प्रशंसा के लिए रुकती नहीं।
