खड्गप्रभानिकरविस्फुरणैस्तथोग्रैः शूलाग्रकान्तिनिवहेन दृशोऽसुराणाम् । यन्नागता विलयमंशुमदिन्दुखण्ड योग्याननं तव विलोकयतां तदेतत् ॥ २० ॥
khaḍgaprabhānikaravisphuraṇaistathograiḥ śhūlāgrakāntinivahena dṛiśho’surāṇām yannāgatā vilayamaṁśhumadindukhaṇḍa yogyānanaṁ tava vilokayatāṁ tadetat
हिंदी अर्थ
आपके खड्ग की भयंकर चमक और त्रिशूल की नोक की घनी कांति से असुरों की आँखें जो नष्ट नहीं हुईं, उसका कारण यही था कि वे चन्द्रमा के समान आनंददायक आपके मुख को देख रहे थे।
भावार्थ
एक और काव्यात्मक विरोधाभास: उनके सुंदर मुख ने उन्हीं असुरों की रक्षा की जिनसे वे लड़ रही थीं। भय और सौंदर्य फिर से उनमें एक साथ रहते हैं।
